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Need create wants, Wants create tension, Tension creates action And Action creates SATISFACTION

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

अच्छा मूड बनाना है तो सिगरेट को कहिए बाय बाय

वैसे तो कोई भी स्मोकर सिगरेट पीने के ढेर सारे बहाने गिना सकता है। जब आप उसे छोड़ने को कहें तो वह अपनी आदत बदलने से साफ इनकार देता है। कई लोगों का तो यह भी कहना है कि वे अवसाद और चिंता से दूर रहने के लिए स्मोकिंग करते हैं। पर, नवीनतम शोध के मुताबिक यदि आप धूम्रपान छोड़ते हैं तो वह आपके मिजाज को प्रसन्न बना सकता है। यह रिसर्च निकोटीन एंड टूबोको रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुई है।

रिसर्चर क्रिस्टोफर केलर ने बताया कि धूम्रपान छोड़ना किसी इंसान के लिए डर की बात नहीं, बल्कि सुखद दीघार्यु जिंदगी के लिए एक छोटा सा त्याग है। यदि उन्हें अपनी जिंदगी में खुशियों की बरसात करनी है तो निश्चय ही उन्हें धूम्रपान छोड़ना होगा। हर एक सिगरेट का कश आपकी जिंदगी के कुछ पल आपसे छीन लेता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि कोई भी सिगरेट के साथ स्मोकर कुछ पल के लिए तो आराम महसूस करता है, बाकी समय एक लंबे अवसाद में ही बिताता है।

केलर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 236 स्मोकरों पर रिसर्च किया। इनमें पुरूष और औरत दोनों शामिल थे। इन लोगों को निकोटीन की पुड़िया दी गई। एक निर्धारित तारीख के बाद उन्हें सिगरेट छोड़ना था। कुछ लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए खास सलाह भी दी गई। निर्धारित तारीख से 1, 2, 8,16 और 18 सप्ताह पहले प्रतियोगियों के अवसाद को मापा गया।

रिसर्चरों ने पाया कि जिन लोगों ने धूम्रपान अस्थायी रूप से छोड़ दिया, उनमें कई बदलाव देखे गए। अब उनका मिजाज पहले की अपेक्षा काफी खुश था। इससे यह साफ पता चलता है कि स्मोकिंग छोड़ना आपकी सेहत के अलावा एक टॉनिक है। यह टॉनिक आपको शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरुस्त करती है।

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

सोमवार, 29 नवंबर 2010

जिंदाबाद जिंदगी

26/11.....2008.... जब आतंकियों की गोलियों से रात की चादर मुंबई ही नहीं, पूरे देश पर फ़ैल गई थी| लेकिन हर रात के बाद एक सुबह होती है, हर अन्धकार का अंत होता है और जिंदगी की सुगंध चारों ओर बहती है| उसी तरह देश की शान होटल ताज का घायल गुम्बद आज हमें हौंसले ऊँचे रखने की प्रेरणा देता है|
     धुंए में लिपटे हुए लाल गुम्बद से निकलती सुर्ख लपटों की रोशनी आज भी आँखों में जलती हुई दिखाई देती है और सारा मंजर याद आ जाता है| मुंबई पर हमला भारतीय गणतंत्र के इतिहास का सबसे घटक, भयानक और सबसे अधिक सबक सिखाने वाला था| जान माल के भारी नुकसान के अलावा हमले में पुलिस के जवानों, कमांडो और विदेशी नागरिकों तक को निशाना बनाया गया| जो देश महाशक्ति बनने की महत्वकांक्षा  रखता है, वह विश्व के सामने विशाल वृक्ष के समान नजर आया जिसका तना खोखला है| यह घटना भारत के बुद्धिजीवीयों के आंतरिक विचारों को पूरे देश के सामने लाती है| मुंबई हमले के दो बरस बाद जब सारा देश  भारत भूमि पर हुए आतंकी आक्रमण का स्मरण कर रहा है तब यह प्रश्न मन में उठता है कि इस हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही अब तक क्यों नहीं हुई ?
   दस आतंकी पाकिस्तान के कराची से स्टीमर पर सवार होकर निकलते है, बड़े आराम से गेट ऑफ इंडिया के करीब मुंबई में दाखिल होते है और चार गुटों में बंट कर पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की तरफ बढ़ जाते है| एक गुट ताज पर कब्ज़ा करता है, दूसरा लिओपोल्ड कैफे और ओबरोए होटल पर धावा बोलता है, तीसरा छब्द हाउस  में घुस जाता है और चौथा छत्रपति रेलवे स्टेशन पर पहुँचता है| वे जहाँ भी जाते हैं खून की नदियाँ बहा देते हैं | बड़ी निर्दयिता से निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया जाता है| जब तक उनमें से 9 मारे जाते हैं और 1 जिंदा पकड़ा जाता है, तब तक वे 180 लोगों को मौत के घाट उतार चुके थे| यह कोई सामान्य तौर पर होने वाला रूटीन आतंकी हमला नहीं था, बल्कि इस घटना को पाकिस्तान की सेना, वहां की ख़ुफ़िया एजेंसी और आतंकवादियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया था| इसके सबूत भारत के पास मौजूद है| पहले तो पाकिस्तान ने इस घटना में अपनी सरजमीं से किसी के भी शामिल होने से इन्कार किया, लेकिन जब सबूतों और पूरी दुनिया का दबाव पड़ा तो उसने बड़ी मुश्किल से स्वीकार किया कि हां इस घटना को उसी की सरजमीं  से अंजाम दिया गया था|
   आतंकी हमला होने के बाद जिस तत्परता की आवश्यकता थी नहीं दिखाई दी| आतंकियों ने जिस खतरनाक रफ़्तार और योजना से हमलों को अंजाम दिया, उसके विपरीत राज्य और केंद्र सरकार का सुरक्षा तंत्र बिल्कुल ही लाचार नजर आया| इस ढांचे ने खुद को सँभालने में काफी समय लिया, तो ये देश को क्या सँभालते ? इस  घटना के सन्दर्भ में सवाल ये उठता है कि मुंबई पर 26/11 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने क्यों कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की ? मुंबई को लहूलुहान कर भारत की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले आतंकियों के संरक्षक और समर्थक आज भी पाकिस्तान में खुले आम घूम रहे हैं| जबकि हमले के दौरान ही ये सन्देश पकड़ में आ गया था कि इसके सूत्रधार पाकिस्तान में बैठे है और हमला कर रहे आतंकियों को आईएसआई और पाक सेना के आला अधिकारीयों की तरफ से निर्देश मिल रहे है, तब भारत खामोश क्यों बैठा रहा ? संसद पर हमले के बाद यह हमारी ख़ामोशी का ही नतीजा था कि आतंकवादियों का हौंसला इतना बढ़ा गया कि उन्होंने मुंबई जैसे खतरनाक हमले को अंजाम देने की हिम्मत जुटाई| यदि भारत ने आक्रामक जवाब उसी समय दे दिया होता तो मुंबई की यह घटना शायद ही होती भारत की इस कमजोरी का फायदा पाकिस्तान बार-बार उठता है| आखिर यह तथ्य है कि हम जिस तरह संसद पर हमले को याद करते है उसी तरह कारगिल युद्ध को भी याद करने की रस्म अदा कर ली जाती है| लेकिन हम है कि अपनी नरम निति में कोई बदलाव ही नहीं लाना चाहते| कठोर कार्यवाही का अर्थ केवल युद्ध छेड़ना ही नहीं होता बल्कि इसके लिए मजबूत राजनितिक इच्छाशक्ति की जरुरत है| आतंकवाद को खत्म करने के लिए जीरो टालरेंस की निति अपनानी होगी और पाकिस्तान से सभी तरह के रिश्ते ख़त्म करने होंगे| सबसे दुर्भाग्य की बात यह है कि मुंबई हमले के सन्दर्भ में भारत सरकार अपने उस वादे पर भी कायम नहीं रह सकी जो उसने देश दुनिया के सामने दृढ़तापूर्वक किया था | देश की जनता को यह भरोसा दिलाया था कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को हर हाल में न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा| लेकिन भारत ने ये सब भूल कर पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया| यह भी कम शर्मनाक नहीं है कि हमले के दौरान रंगे हाथ पकड़ा गया आतंकी कसाब आज भी जेल की रोटियां तोड़ रहा है| आखिर देशवासी ये क्यों न महसूस करे कि उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा है| भारत सरकार चाहे जैसे भी दावे कर देश की जनता को सांत्वना देने का प्रयास क्यों न करें, वह पाकिस्तान पर दबाव बनाने में समर्थ नहीं है| यह भयानक घटना तब हुई जब भारत अनेक आतंकी हमलों की मार झेल चुका था | 2008 में ही 13 मई को जयपुर में 8 बम विस्फोटों में 80 लोगों की मौत हुई, 26 जुलाई को अहमदाबाद में श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों में 53 लोग मारे गए और दिल्ली में हुए 8 धमाकों में 26 लोग मौत के मुंह में समा गए | दुर्भाग्य से, ऐसा लगता है कि भारत ने न सुधरने की कसम खा रखी है, जिस कारण बार -बार हमले होते हैं| पाकिस्तान में जब बाढ़ आई तो उसने सहयोग लेने से मना कर दिया| इसके बावजूद भारत ने उसे 2.5 करोड़ डॉलर दिए, जो एक तरह से उनके मुंह में जबरन ठुसने जैसा था | आज इस पर विचार करने की जरुरत है कि क्या मजबूत पाकिस्तान वाकई भारत के हित में होगा ? पाकिस्तान अपने यहाँ से भारत में आतंकी हमलों का ताना-बाना बुनता रहता है और इन्हें अंजाम देता रहता है, लेकिन दिल्ली में बैठी सरकार सिर्फ अटकलें ही लगाती रहती है कि कब कहाँ हमला हो सकता है और इन्हें कैसे रोका जाये ? हमारे प्रधानमंत्री का यह कानूनी दायित्व है कि वह देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को सुनिश्चित करे | परन्तु उनके कामों को देखा कर यह नहीं कहा जा सकता कि वे अपनी  सवैंधानिक जिम्मेदारी को भी पूरा करने में ईमानदार रहे हैं | हमारी सरकार गुलाम मानसिकता की शिकार है, इसलिए हमारा व्यवहार व कार्यवाही का स्तर भी गुलामों जैसा ही है| हम हर मामले में अमेरिका का मुंह ताकते रहते हैं | अगर दूसरी तरफ देखा जाये - आतंकवाद के पहले चरण में कश्मीरी पंडित और अन्य निर्दोष लोगों को घाटी में मौत के घाट उतारा गया था | इस बुद्धिजीवी वर्ग ने तब भी इनके प्रति सहानुभूति का प्रदर्शन नहीं  किया था | दूसरी तरफ इन्हीं में से कुछ ने कश्मीरी युवाओं के खिलाफ सवाल उठाते हुए आतंकवाद को जायज ठहराने की कोशिश की| जिसके कारण देश को बेहिसाब नुकसान उठाना पड़ा| आतंक नामक कैंसर को तो शुरुआत में ही ऑपरेशन कर ख़त्म कर देना चाहिए था| लेकिन अब आतंक की ये कोशिकाएं पूरे शरीर में फैल गई है और भारत के महत्वपूर्ण अंगों पर वार कर रही हैं| इसके खात्मे के लिए अब लम्बा समय और भरी  संसाधन  चाहिए | पहले  ही हजारों  जानें  और  हजारों  करोड़ों  रूपये  इसकी भेंट चढ़  चुके  हैं | अगर  हम  26/11 की  पुनरावृति  से  बचना  चाहते  है  तो  खुद  से  कुछ  सवाल  पूछने  होंगे - क्या  हम  अपने  शासन  तन्त्र  में  सुधर  ला  रहे  हैं और  अपनी  राजसता  की  कमियों  को  दूर  करने  की  दिशा  में  कम  कर रहे  हैं? क्या  हम बुद्धिजीवी  तबके को  नई दिशा दे रहे है? क्या हम  लोगों में नया रुख और दृष्टिकोण पैदा करने  की  कोशिश  कर  रहे  हैं ?
इस  घटना  की  कहानी  बयां  करने  के  लिए  आंसू  भी  कम  पड़ जाते  है.......|

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

Learn From Failure..........

 I will not say I failed 1000 times, I will say that
 I discovered 1000 ways that can cause failure.

                                      Thomas Alva Edison

Everybody Can Made Mistakes

If someone feel that he never made a mistake in their life,
It means they have never tried a new thing in their life.

                                                               Albert Einstein

Napoleon said...........

The world suffers a lot…Not because of the violence of bad people,But because of the silence of good people!
                                                         

Problems Tells U R On Right Path

In a day when you dont come accross any problems, 
You can be sure that you are travelling in a wrong path.

                                                      SWAMI VIVEKANAND